मैं सिर्फ मनोरंजन के लिए फिल्म नहीं बनाता – शंख घोष

HnExpress सीताराम अग्रवाल, कोलकाता : मैं सिर्फ मनोरंजन के लिए फिल्म नहीं बनाता, बल्कि जीवन के उन पहलुओं को उजागर करने की कोशिश करता हूं। जिनमें विसंगतियों में भी जीवंतता है, जीने की एक कला है। मैं यह नहीं सोचता कि दर्शक इसे किस रूप में लेंगे। फिल्म को पसन्द करना या नहीं करना, यह उनका अधिकार है।

हां अपनी बात, अपने विचारों को पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ फिल्म के माध्यम से पेश कर देता हूं- यह कहना है निर्माता-निर्देशक शंख घोष का। जो आज नन्दन में अपनी बंगला फिल्म ‘शुन्य (जीरो)’ पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। ज्ञातव्य है कि श्री शंख फिल्म के निर्देशक होने के बावजूद इसके निर्माता, पटकथा लेखक व संगीतकार भी हैं।

साथ ही इन्होंने फिल्म में अभिनय भी किया है। प्रख्यात निर्देशक श्री शंख ने हाल ही में चार अध्याय, कमला सुन्दरी नाचे रे तथा Atin Ela जैसी फिल्मों का निर्देशन किया है। जहाँ तक फिल्म की कहानी का सवाल है, यह एक स्वतंत्र फिल्म निर्माता के बारे में है, जिसकी सोच वर्तमान आर्थिक-सामाजिक स्थिति से अलग है। स्वतंत्र फिल्म निर्माता अर्पन व उसकी पत्नी रंगिनी का वैवाहिक जीवन विरोधाभास से भरा है।

एक ओर जहां अर्पन एक ऐसी दुनिया में खोया रहता हैं जो वास्तविकता से कोसों दूर है। जबकि रंगिनी अपने को वर्तमान जगत के अनुरूप ढ़ालने की कोशिश में है। इसी जद्दोजहद में कहानी आगे बढ़ती है और एक ऐसे अंत के साथ खत्म होती है, जो दर्शकों को बहुत कुछ सोचने पर विवश करती है। हालांकि इस तरह की फिल्में भले ही टिकट खिड़की पर सफल न हो, पर खास किस्म के दर्शकों को मानसिक खुराक अवश्य देती है।

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