छठ पूजा : अस्त होते सूरज को अर्घ्य

HnExpress 21 नवम्बर, सीताराम अग्रवाल, कोलकाता : आस्था और विश्वास के महापर्व छठ का पहला अर्घ्य पूरे भक्ति भाव के साथ सम्पन्न हुआ। कहते हैं डूबते सूरज को कोई सलाम नहीं करता। पर धन्यवाद हे यह भारत देश, जहां इस कहावत को गलत साबित करते हुए प्रति वर्ष छठ व्रतधारियों द्वारा पहला अर्घ्य अस्त होते सूरज को दिया जाता है। उन्हें प्रणाम किया जाता है। वैसे कोरोना रोग के कारण इस बार पर्व मनाने की प्रक्रिया बिलकुल अलग रही।

हर बार की तरह न जुलूस, न बैंड-बाजा और ना ही पटाखों के धमाके। हालांकि ये सब कदम कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिये सावधानी के रूप में उठाये गये हैं। हालांकि कुछ स्थानों पर कई दशकों से परम्परागत रूप से छठ मनाते आये श्रद्धालुओं को पर्यावरण संरक्षण के नाम पर अदालती आदेश के कारण इस बार उक्त स्थानों का उपयोग नही कर पाने के कारण खिन्न मन से वैकल्पिक व्यवस्था अपनाने पड़ी।

वैसे एक तबके ने स्वास्थ्य व अन्यान्य कुछ कारणों से नयी व्यवस्था का स्वागत किया। खैर चाहे जो हो, प्रत्येक घाट पर छठ व्रतधारियों की भारी भीड़ देखी गयी। लोगों ने छठ माई से कोरोना से मुक्ति का आशीर्वाद भी मांगा। कल उगते सूरज को अर्घ्य देने के साथ ही इस चार दिवसीय महा पर्व का समापन हो जायेगा।

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